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गुरुवार, 15 जून 2017

जो हुआ अच्छा हुआ।।

जो हुआ अच्छा हुआ।।

जो हुआ अच्छा हुआ / Accept Change Motivational Articles In Hindi

लोगो का यही मानना होता है की समय और तारीख के बदलते ही जिंदगी भी बदलती है. लेकिन वास्तव में जिंदगी का बदलाव किसी निश्चित तारीख या समय पर निर्भर नही करता. बल्कि यह तो सतत चलने वाली हर किसी के जीवन में होने वाली प्रक्रिया है.

जिंदगी हमेशा चलती रहती है. जीवन में यदि कोई चीज स्थिर है तो वह बदलाव है. जिंदगी का हर एक पल बदलता रहता है. फिर चाहे उन पलो में आप नए घर भी जा सकते हो, नयी जगह भी जा सकते हो, नया जॉब भी हासिल कर सकते हो, नयी कार भी खरीद सकते हो, शादी या तलाख भी कर सकते हो, बच्चे को जन्म भी दे सकते हो, आर्थिक लाभ या हानी भी हो सकती है और कुछ भी बदलाव हो सकते है. ये सब कुछ हम सभी के जीवन में होता है. हमारे जीवन का ये एक प्राकृतिक भाग है. कभी-कभी बदलाव हमारे हीत में भी हो सकते है और कभी-कभी हमारे विरूद्ध भी हो सकते है. लोग बदलाव को जिंदगी की सबसे बड़ी चीज मानते है. क्योकि बदलाव हम में से हर किसी के जीवन में होता ही है.

इस दुनिया में, चीजे कभी एक जैसी नही रहती, वे लगातार बदलती रहती है. इंसानी विचारो की तरह इस दुनिया में चीजे भी बदलती रहती है. बदलाव को रोकने के फिर चाहे आप कितने की प्रयास क्यों न कर लो, बदलाव यदि होना है तो आप उसे होने से नहीं रोक सकते. जिंदगी में होने वाले बदलावों को आप नहीं रोक सकते.

बदलाव जीवन का ही एक प्राकृतिक भाग है. हमें बदलाव को बिना किसी विरोध के अपनाना चाहिये. साधारणतः सामान्य लोगो को बदलाव से काफी डर लगता है. क्योकि उन्हें इस बात का डर होता है की कही बदलाव से वे विपरीत परिस्थितियों में न फास जाये, या फिर कही वह अपनी वर्तमान सफलता न खो बैठे. यह सिद्ध हो चूका है की किसी के भी खिलाफ लड़ने से वह आपको और ज्यादा ख़राब बनाते है. बदलाव हमेशा अलग-अलग नही होते. जब आप बदलाव का सामना करते हो तो उस से आपको गुस्सा, अशांति, दर्द, चिंता और तकलीफ हो सकती है क्योकि उस समय आपको नकारात्मक प्रतिक्रिया मिलती रहती है. इसीलिए आनंदमय जीवन जीने के लिये आपको यह सलाह देना चाहूँगा की जीवन में बदलाव को ख़ुशी से अपनाये. अपनी महत्वपूर्ण उर्जा को गुस्सा करने में, चिंता करने में या लड़ने में व्यर्थ न करे. बल्कि अपनी उर्जा को अच्छी आदतों में लगाये.

यदि बदलाव से आपका कोई आर्थिक नुकसान होता है तो ज्यादा चिंतित मत होइए क्योकि शारीरिक और मानसिक नुकसान की तुलना में आर्थिक नुकसान काफी छोटा होता है. यहाँ मै आपको कुछ उपाय बताऊंगा जिससे आप बदलाव से होने वाले इन नुकसानों से बच सकते हो.

बदलाव को अपने विकास का अवसर समझे, उसे विकास के नजरिये से देखे और उसे हसी-ख़ुशी अपनाये. नयी परिस्थितियों का, नयी चुनौतियों का हमेशा स्वागत करे. आपमें सच का सामना करने की और उसे सुनने की आदत होनी चाहिये, तभी आप अपने लक्ष्य को हासिल कर सकते हो. बदलाव के इस अवसर को आपके कल्याण के लिये भगवान् द्वारा भेजा गया पुरस्कार समझिये. आपको हमेशा यह याद रहना चाहिये की भगवान् हमेशा आपके लिये अच्छा ही चाहता है और हमेशा आपका ध्यान रखता है. स्वर्ग में बैठा वह आपके पिता समान है. इसीलिए उनके द्वारा भेजे गए अवसरों के रास्तो पर चलते हुए आप कभी गलत मार्ग पर नही जा सकते. इसीलिए जीवन में बदलाव को आसानी से अपनाये.

हमेशा याद रखे की हर नकारात्मक परिस्थिति भविष्य में आपके लिये सकारात्मकता के बीज बोये रखती है. यदि आपने कोई पुराणी चीज खो डी है तो डरिये मत भविष्य में आपको उस से भी अच्छी चीज मिल सकती है. यदि आप बदलाव को चुनौतियों और अवसर की तरह स्वीकार करो तो आपका जीवन समृद्ध जीवन बन सकता है.

बदलाव का सबसे बड़ा उदाहरण हमारे सामने पिछले 150 सालो का है. पिछले 150 सालो में तेज़ी से देश में बदलाव हुए है और देश का विकास हुआ है, और ये बदलाव आज भी चलता जा रहा है. आप भी बदलाव की इसी दुनिया में रहते हो इसलिए आपको सहज ही इसे अपनाना चाहिये –

                          आपका मित्र
                      चन्दन कुमार
                पलामू,,,झारखण्ड।।
        

 फिल्मस्टार वरुण धवन की जीवनी

फिल्मस्टार वरुण धवन की जीवनी

वरुण धवन प्रारंभिक जीवन – Varun Dhawan Early Life

वरुण धवन का जन्म 24 अप्रैल 1987 को महाराष्ट्र के मुंबई शहर में हुआ। वरुण धवन पिता लोकप्रिय फिल्म निर्देशक वरुण धवन हैं, और वरुण धवन की मां करुणा धवन है। उनका एक छोटा भाई रोहित धवन है। वरुण धवन को प्यार से पप्पू नाम से बुलाते हैं जो कि उनके पिता डेविड धवन ने रखा था।

उन्होंने बॉम्बे स्कॉटिश स्कूल में अध्ययन किया। उन्होंने यूनाइटेड किंगडम के नॉटिंघम विश्वविद्यालय से बिजनेस मैनेजमेंट में डिग्री हासिल की। डेविड धवन उसे एक इंजीनियर या डॉक्टर बनाना चाहते थे, लेकिन अपनी मां के कारण वह बॉलीवुड जगत में आए। वरुण धवन और अर्जुन कपूर ने बैरी जॉन के अभिनय स्कूल में अध्ययन किया।

वरुण धवन बॉलीवुड कैरियर

कहा जाता हैं की वरुण धवन ने फिल्म स्टूडेंट्स ऑफ द इयर के साथ अपने बॉलीवुड कैरियर की शुरुवात की, लेकिन यह सच नहीं है। बल्कि वरुण धवन ने अपनी बॉलीवुड कैरियर की शुरुआत करन जौहर के साथ फिल्म ‘माइ नोम इज खान’ में सह-निर्देशक के रूप में शुरू की।

उन्होंने स्क्रीन पर आने के लिए दिन-रात कड़ी मेहनत की और अंततः 2012 में करण जौहर की फिल्म ‘स्टूडेंट ऑफ दी इयर’ में मौका मिला जो सुपरहिट फ़िल्म रही। फिल्म में तीन नए चेहरें दिखाई दिए उनमेसें एक वरुण धवन, मुकेश भट्ट की बेटी आलिया भट्ट, और उस समय दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र सिद्धार्थ मल्होत्रा थे।

उनके सह-कलाकारों अलिया भट्ट और सिद्धार्थ मल्होत्रा के साथ उन्हें बहुत लोकप्रियता मिली। बॉलीवुड की उनकी दूसरी फिल्म मुख्य मैं तेरा हीरो थी, जिसे उनके पिता ने निर्देशित किया था और इस फिल्म ने भी एक छोटी सी अवधि में लोकप्रियता हासिल की।

फिर उन्हें ‘बदलापुर’, हम्प्टी शर्मा की दुल्हनिया (2014), ‘एबीसीडी 2’ और कई अन्य जैसी कई फिल्मों में देखा गया। जिसकी दुनिया भर में 1 अरब डॉलर से ज्यादा कमाई हुई।

अपराध थ्रिलर बदलापुर (2015) में बदला लेने के लिए उन्होंने सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए फिल्मफेयर अवार्ड के लिए नामांकन अर्जित किया। उन्होंने शाहरुख खान और काजोल के साथ फिल्म ‘दिलवाले’ भी बनाई है। ढिशुम (2016), और रोमांटिक कॉमेडी बद्रीनाथ की दुल्हनिया (2017) में अभिनय किया।

वरुण धवन अपने एक्टिंग के जरिये अपने प्रसंशको के दिलो पर राज कर रहे हैं वो अपने जीवन में ऐसेही सफ़लता हासिल करते रहे।

कुछ तो लोग कहेंगे....

कुछ तो लोग कहेंगे....

कुछ तो लोग कहेंगे…. 
Hindi Short Stories

एक किसान और उसका बेटा उनके गधे को जिले के जगह बेचने ले जा रहे थे. शुरवात को वो दोनों भी पैदल चल रहे थे. और गधा उनके साथ में चल रहा था. वो देखकर एक आदमी ने उस बेटे को गधे पर बिठाने की सलाह दी. उसके अनुसार वो लड़का गधे पर बैठ गया और किसान पैदल और वो आगे चल पड़े. कुछ दूर जाने के बाद दुसरे एक आदमी ने कहा की “पिता के उम्र की पर्वा किये बगैर लड़का गधे पर बैठा” ये सुनकर. वो लड़का शर्मिंदा होकर गधे से निचे उतरा और उसके जगह वो किसान गधे पर बैठ कर आगे का सफर शुरु किया.

इसी तरह और थोडा सफर करने के बाद उन्हें तीसरा आदमी मिला उसने कहा की “लडके की चिन्ता न करके खुशाल गधे की तरह गधे पर बैठा है” ऐसा वो आदमी किसान को गुस्से से बोला. उस किसान को बुरा लगा और वो गधे से निचे उतर गया. अब आगे क्या करना इसी सोच में वो रास्ते के बाजु में पेड़ के निचे बैठा. तभी वहा से चौथा आदमी आया. उस चौथे आदमी को अभी तक का अपना अनुभव बता कर आगे क्या करे इस विषय में किसान ने सलाह मांगी. उस चौथे आदमी ने बड़ी आसानी से किसान और उसके बेटे दोनों को गधे पर बैठ कर सफर करने की सलाह दी.

उसके बाद वो सफर पर चल पडे. कुछ समय के बाद उन्हें पांचवा आदमी मिला और उसने कहा “बाप – बेटा दोनों भी गधे पर बेठेने के वजह से उस गधे का क्या हाल हो रहा होंगा” ऐसा सवाल उसने पूछा और उसके बाद वो दोनों बाप – बेटे उस गधे से उतर गये और पैदल चलने लगे….

तात्पर्य – अगर आप लोगो की हर बात सुनकर कुछ भी करने जाओंगे…. तो कुछ भी नहीं कर पाओगे…

,plz  share करे।

                 आपका मित्र
              चन्दन कुमार
          पलामू,,झारखण्ड।।
       Whatsapp no.-8973731965